लोकसभा चुनाव में ओछी राजनीती और ओझल होते विकास के मुद्दे (देशहित में करे अपना मत) - Snaplala

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23 April 2019

लोकसभा चुनाव में ओछी राजनीती और ओझल होते विकास के मुद्दे (देशहित में करे अपना मत)

पिछले तक़रीबन महीनो से हमारे देश में केवल एक ही चर्चा है अगर हवा में भी कोई बात है तो वो है चुनाव की अब अगर एक नजर से देखा जाये तो ये सही भी है देश में चुनाव होने वाले है तो बात तो होनी चाहिए मगर इसका भी एक तरीका हो अगर बात करनी है तो सरकार के बारे में करो अगर बात करनी है तो बात करो देश की ना की कुछ राजनीतिक  दलों की तरह एक दूसरे पर कीचड़ उछालते रहो की आपकी सरकार नें क्या किया या फिर पिछले 70 साल में क्या हुआ तो मैं यह कहना चाहता हूँ की पिछले 70 साल में जो भी हुआ अब इसके बारे में केवल बात ही की जा सकती है परन्तु आज से 10 साल बाद हम अपने को एक देश के रूप में कहा देखते है हम अपने देश के बारे में क्या सोचते है तो आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे लोकसभा चुनावों की और उन मुद्दों की जिन पर वास्तव में चर्चा होनी चाहिए और इस लेख के लिए हिंदी भाषा चुनने का कारण है ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस आर्टिकल का पहुंचना जिससे  जिससे लोग थोड़े तो जागरूक हो सकें  वर्तमान में यदि देश की सबसे बड़ी दो पार्टियों की बात करें तो वह है कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी यह दोनों ही पार्टियां कभी न कभी देश में शासन में  रही है और दोनों  ही पार्टियां अपने विवादास्पद विवादों की वजह से सुर्ख़ियो में रहती है चाहे बात आजकल चल रहे गठिया बयानों की हो या फिर आपस के लड़ाई झगडे की पिछले गुजरात चुनावो में कांग्रेस के एक नेता मणिशंकर  अय्यर ने भारत के प्रदानमंत्री को नीच तक कह दिया था जिसके बाद बात काफी बढ़ी और उन्हें माफ़ी भी मांगनी पड़ी थी, बात केवल कांग्रेस की ही नहीं है अपितु भाजपा के समर्थक और नेता तो अपोजिसन के नेता की पप्पू तक बुलाते हैं राजस्थान के चुनावों में भाजपा के ही  एक नेता नें भगवान हुनमान जी को आदिवासी बताया, चुनावों में यदि भगवान को खींच लिया जाये तो फिर बात करने को कुछ खास रह ही नहीं जाता हैं इसी प्रकार भारत के प्रधानमंत्री स्वयं को चौकीदार बताते हैं और विपक्ष इस बात पर कहता हैं की चौकीदार ही चोर है एक दूसरे पर होने वाले आक्षेपो का स्तर  इतना गिर गया है की कभी-कभी बात हाथा पाई की भी आ जाती है थोड़ी बहुत गालियाँ देना तो आम  हो  गया है 
      यह तो हुई भारत की राजनीतिक  पार्टियों की बात अब बात करते हैं इनके समर्थकों की अगर हम इंटरनेट और सोशल मीडिया की बात करें तो किसी भी राजनीतिक खबर पर यदि आप जाकर कमेंट पढ़ते हैं तो वहां काम की बात तो दूर दूर तक होती नहीं है वरन वह एक अलग ही पक्ष विपक्ष की लड़ाई लड़ी जा रही होती है जिसमे कुछ लोग एक-दूसरे पर कमैंट्स के माध्यम से ही हमला कर रहे होते हैं अगर बात यहीं तक सीमित हो तो फिर भी चल सकता है परन्तु उन कमेन्ट्स में प्रयोग  की गई भाषा किसी भी भद्र व्यक्ति को शर्मशार करने वाली होती है किसी के भी विषय में ऐसा कहना जिस व्यक्ति को शायद आप जानते भी नहीं हो ओर  तो ओर आप यदि दक्षिण में बैठे है तो हो सकता है की वो व्यक्ति सुदूर उत्तर में बैठा हो इसके बावजूद ऐसी ओछी भाषा का प्रयोग कदापि उचित नहीं है ना ही हमारी भारतीय संस्कृति हमें ऐसा करने को कहती है ना ही हमारा अन्तर्मन।

 अब बात करते हैं हमारी मीडिया की, समस्त विश्व में मीडिया को किसी भी देश के शासन का चौथा स्तंभ कहा जाता है हमारे भारत में भी ऐसे ही कहा जाता है, परंतु हमारी मीडिया दिन प्रतिदिन इस बात को झूठा सिद्ध करने में लगी है अगर बात की जाए वर्तमान में चलने वाले टीवी चैनलों की तो ये भी दो खेमों में बंटे हुए प्रतीत होते हैं, एक सामान्य व्यक्ति यदि दो अलग-अलग चैनल देखे तो वह पूर्ण विश्वास के साथ यह कह पायेगा कि अमुक चैनल भाजपा का समर्थक है और दूसरा चैनल कांग्रेस का , एक चैनल केवल भाजपा की तारीफ ही करता रहेगा और दूसरा चैनल  कांग्रेस की। ऐसे में मीडिया पर से विश्वास भी कम होता जा रहा है। अखबारों के भी कुछ ऐसे ही हाल है परंतु इनमें गुटबाजी अभी उच्च स्तर तक नहीं पहुंची है। 

   अब बात करते हैं एक पार्टी को मीडिया व सोशल मीडिया से मिलने वाली सहायता की, अभी हाल ही में हुई बालाकोट पर भारतीय वायुसेना की सर्जिकल स्ट्राइक की जिसमें भारतीय वायुसेना ने अपने मिराज हवाई जहाजों की सहायता से पाकिस्तान पर बम गिराए थे, भारतीय मीडिया ने इस खबर को इस प्रकार दिखाया की मानो प्रधानमंत्री स्वयं कोई जहाज उडाकर ले गऐ हों, माना की भारतीय प्रधानमंत्री का यह कदम प्रशंसनीय था कि उन्होंने वायुसेना को ऐसा कदम उठाने की इजाजत दी, परंतु इस प्रकार की प्रशंसा देखने लायक थी, अब बात करते हैं एक और चर्चित विषय की जिसे उछाला कांग्रेस के अध्यक्ष ने यह मामला है राफेल हवाई जहाज का जिसे भारत नें फ्रांस से खरीदा है कांग्रेस का कहना है इस सौदे में एक व्यक्ति को भ्रष्टाचार के जरिए फायदा पहुंचाया गया और वह चाहती है कि भारतीय सरकार इस डील के समस्त आंकड़े सार्वजनिक कर दें, भारतीय सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है इसके कागज इतने आसानी से सार्वजनिक नहीं किये जा सकते है, परंतु कांग्रेस के समर्थक चैनल व सोशल मीडिया फोरम ने इस मामले को इतना उड़ाया के समस्त विश्व में इस बात की चर्चा हुई। ऐसा करना भी कदापि उचित नहीं था यह बात मैं किसी भी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में होकर नहीं अपितु एक आम भारतीय नागरिक के तौर पर लिख रहा हूं। तो ऐसा होना भी सही नहीं हैं।
  अंत में बात की जाए उन मुद्दों की जिनके विषय में वास्तव  में बात की जानी चाहिए, जिनका जिक्र केवल राजनीति पार्टीयों के मैनिफेस्टो में सिमट कर रह जाता है ना तो इनके बारे में ज्यादा बात की जाती है ना ही इनके विषय में कभी कुछ किया जाता   है यह मुद्दे है देश के आम नागरिकों के बारे में, यह मुद्दे है देश के उन गरीब किसानों के बारे में जिन्हे दुखों से तंग आकर आत्महत्या करनी पड़ती हैं यह मुद्दे है उस विद्यार्थी के जो नौकरी के इंतजार में अपने बाल सफेद कर लेता है परंतु उसे मिलता है तो सिर्फ कोर्ट कचहरी की तारीखें ना तो फैसला आता है और ना ही परीक्षा का परिणाम । मुद्दा है महिलाओं की सुरक्षा का आज भारत में तकरीबन 7 मिनट में एक बलात्कार की घटना होती है इसे रोकना हमारा मुद्दा होना चाहिए। हमारा मुद्दा होना चाहिए  हमारे शहरों में बढ़ती गंदगी और फेलते हुए प्रदूषण का, हमारी गंदी व  प्रदूषित होती नदियों का, हमारा मुद्दा होना चाहिए सड़कों पर बेबस पड़े लोगों का जिनके पास ना तो खाने को रोटी होती है और ना ही रहने को घर, हमारा मुद्दा होना चाहिए इस देश के हर आदमी को उसका हक उसकी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का। भारत एक विशाल देश है यहां समस्याएं खत्म नहीं हो सकती हैं परंतु हमें ऐसा एक नेता चाहिए जो प्रयास करें इन समस्याओं को खत्म करने का, प्रयत्न करें इस देश को उस ऊंचाई तक पहुंचाने का जहां इसे होना चाहिए। ऐसा होने के लिए भारत के हर आदमी को जागरुक होना होगा हर आदमी को कम से कम अपने कर्तव्यों का  निर्वहन करना ही होगा। लोकसभा चुनाव नजदीक हैं ऐसे में बचें ऐसे लोगों से जो आपके वोट के लिए आपको भ्रमित करें,  बचे ऐसे लोगों से जो आपको लालच दे, मतदान अवश्य कीजिए और ऐसे व्यक्ति को करें जो वास्तव में आपके मत के लायक हो। कोशिश की जाएगी आप को धर्म के नाम पर जाति के नाम पर बांटने की परंतु यहां सावधान रहना होगा, अपना मत किसी पर जातिगत आधार पर ना दें, अपने मत का प्रयोग करें तो केवल देश का सोचकर।  


एक आम आदमी ।। जय हिन्द जय भारत ।। 
     
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